भारतीय मूल की नासा अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और उनके साथी बैरी विलमोर अंतरिक्ष में 286 दिनों के विस्तारित मिशन के बाद सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर लौट आए हैं। स्पेसएक्स क्रू-9 ड्रैगन कैप्सूल ने फ्लोरिडा तट के पास सफलतापूर्वक स्प्लैशडाउन किया, जहां आदर्श परिस्थितियों में लैंडिंग हुई।
286 दिनों का ऐतिहासिक मिशन
मूल योजना के तहत, विलियम्स और विलमोर को अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर केवल 8 दिनों के लिए रहना था, लेकिन तकनीकी कारणों से उनका मिशन लगभग 10 महीनों तक बढ़ गया। दोनों अनुभवी अंतरिक्ष यात्री पहले अमेरिकी नौसेना में परीक्षण पायलट रह चुके हैं।
स्प्लैशडाउन और रिकवरी ऑपरेशन
स्पेसक्राफ्ट के उतरते ही डॉल्फिन्स का एक झुंड उसे करीब से देखने आ गया, जिससे यह एक अनोखा नजारा बन गया। नासा की रिकवरी टीमें तुरंत हरकत में आईं, कैप्सूल को रिकवरी पोत तक ले जाया गया, जहां यात्रियों की प्रारंभिक चिकित्सा जांच की गई। इसके बाद, पूरा दल हेलीकॉप्टर से नासा के ह्यूस्टन स्थित मुख्यालय रवाना हुआ, जहां वे अपने परिवारों से मिले।
स्पेसएक्स और नासा की साझेदारी
स्पेसएक्स और नासा का वाणिज्यिक क्रू प्रोग्राम पृथ्वी की कक्षा में अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने के लिए बनाए गए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप का हिस्सा है। इससे पहले, नासा को अंतरिक्ष यात्रियों के रोटेशन के लिए रूसी सोयुज स्पेसक्राफ्ट पर निर्भर रहना पड़ता था। अब, स्पेसएक्स और बोइंग का स्टारलाइनर प्रोजेक्ट इस दिशा में नासा की नई पहल है।
क्या है भविष्य की योजना?
नासा भविष्य में अंतरिक्ष मिशनों को और बेहतर बनाने के लिए स्पेसएक्स और अन्य निजी कंपनियों के साथ मिलकर काम कर रहा है। वहीं, सुनीता विलियम्स के इस ऐतिहासिक मिशन ने भारतीयों के लिए अंतरिक्ष विज्ञान में नई प्रेरणा जगाई है। 🚀🌍